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Chapter 1

🎓 Class 11📖 Rasayan Vigyan bhag-I📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
अध्याय 1 / 6Chapter 2

Chapter 1अध्ययन नोट्स

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रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

व्याख्या

रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

रसायन विज्ञान पदार्थों के संघटन, संरचना, गुणधर्म और उनके बीच होने वाली क्रियाओं का अध्ययन करने वाला विज्ञान है। यह न केवल तत्वों का अध्ययन करता है, बल्कि उनसे बने अणुओं और उनके रूपांतरण का भी अध्ययन करता है। विज्ञान के अन्य क्षेत्रों की तरह रसायन विज्ञान भी मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हमें पदार्थों की प्रकृति को समझने, उनके गुणों का विश्लेषण करने और रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से नए पदार्थों का निर्माण करने में मदद करता है। प्राचीन काल से ही मानव ने रसायन विज्ञान के तत्वों को समझने का प्रयास किया। आग का उपयोग, धातुओं का पिघलना, मिश्रण बनाना आदि प्राचीन रासायनिक प्रक्रियाएँ थीं। भारत में भी रसायन विज्ञान का इतिहास बहुत पुराना है, जिसमें मोहनजोदड़ो और हड़प्पा सभ्यता के अवशेषों से रासायनिक तकनीकों के प्रमाण मिलते हैं। आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी रसायन विज्ञान के सिद्धांतों और प्रयोगों का उल्लेख मिलता है। रसायन विज्ञान का विकास एल्किमी (कौमिया) से आधुनिक रसायन विज्ञान तक हुआ है। एल्किमी का उद्देश्य पारस पत्थर और अमृत की खोज था, जो धातुओं को सोने में बदलने और अमरत्व प्रदान करने का माध्यम माना जाता था। आधुनिक रसायन विज्ञान ने 18वीं शताब्दी में यूरोप में आकार लिया। इस अध्याय में द्रव्य की अवस्थाएँ, उनके गुणधर्म, मापन की विधियाँ, रासायनिक संयोजन के नियम, परमाणु सिद्धांत, मोल की अवधारणा, प्रतिशत संघटन, मूलानुपाती और आण्विक सूत्र, स्टॉइकियोमीट्री आदि की मूल अवधारणाएँ विस्तार से समझाई गई हैं।

  • रसायन विज्ञान पदार्थों के संघटन, संरचना और गुणधर्म का अध्ययन है।
  • भारत में रसायन विज्ञान का इतिहास प्राचीन काल से है।
  • एल्किमी से आधुनिक रसायन विज्ञान का विकास हुआ।
  • रसायन विज्ञान जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है।
  • यह विज्ञान पदार्थों के आपसी क्रियाओं को समझने में सहायक है।
  • 📌 रसायन विज्ञान: पदार्थों के संघटन, संरचना, गुणधर्म और अभिक्रियाओं का विज्ञान।
  • 📌 एल्किमी: धातुओं को सोने में बदलने और अमरत्व प्राप्त करने की प्राचीन कला।
  • 📌 मोल: पदार्थ की मात्रा मापने की इकाई।

1.2 द्रव्य की प्रकृति

व्याख्या

1.2 द्रव्य की प्रकृति

द्रव्य वह वस्तु है जिसका द्रव्यमान होता है और जो स्थान घेरती है। हमारे आसपास की सभी वस्तुएं द्रव्य से बनी होती हैं। द्रव्य की तीन अवस्थाएँ होती हैं – ठोस, द्रव और गैस। इन तीनों अवस्थाओं में कणों की व्यवस्था और गति भिन्न होती है। ठोस में कण एक-दूसरे के बहुत पास और क्रमबद्ध होते हैं, इसलिए ठोस का निश्चित आकार और आयतन होता है। द्रव में कण पास-पास होते हैं लेकिन स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं, इसलिए द्रव का निश्चित आयतन होता है पर उसका आकार परिवर्तनीय होता है। गैस में कण बहुत दूर-दूर होते हैं और स्वतंत्र गति करते हैं, इसलिए गैस का आकार और आयतन दोनों परिवर्तनीय होते हैं। द्रव्य को तत्व, यौगिक और मिश्रण में वर्गीकृत किया जा सकता है। शुद्ध पदार्थों में एक ही प्रकार के कण होते हैं, जबकि मिश्रण में दो या अधिक प्रकार के कण होते हैं। शुद्ध पदार्थों को तत्व और यौगिक में बांटा जाता है। तत्वों में एक ही प्रकार के परमाणु होते हैं, जबकि यौगिकों में दो या अधिक तत्व निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से जुड़े होते हैं। परमाणु वह सबसे छोटा कण है जो तत्व के गुणों को बनाए रखता है। अणु दो या दो से अधिक परमाणुओं के संयोजन से बनता है। उदाहरण के लिए, H₂, O₂, N₂ अणु हैं। यौगिकों के अणु में विभिन्न तत्वों के परमाणु निश्चित अनुपात में जुड़े होते हैं, जैसे जल (H₂O) में दो हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन परमाणु होते हैं।

  • द्रव्य की तीन अवस्थाएँ: ठोस, द्रव, गैस।
  • ठोस का निश्चित आकार और आयतन होता है।
  • द्रव का निश्चित आयतन पर आकार परिवर्तनीय होता है।
  • गैस का आकार और आयतन दोनों परिवर्तनीय होते हैं।
  • शुद्ध पदार्थों में एक ही प्रकार के कण होते हैं।
  • मिश्रण में दो या अधिक प्रकार के कण होते हैं।
  • 📌 द्रव्य: वह वस्तु जिसका द्रव्यमान होता है और जो स्थान घेरती है।
  • 📌 तत्व: शुद्ध पदार्थ जिसमें एक ही प्रकार के परमाणु होते हैं।
  • 📌 यौगिक: दो या अधिक तत्वों के परमाणुओं का निश्चित अनुपात में संयोजन।

1.3 द्रव्य के गुणधर्म और उनका मापन

व्याख्या

1.3 द्रव्य के गुणधर्म और उनका मापन

द्रव्य के गुणधर्म दो प्रकार के होते हैं – भौतिक गुणधर्म और रासायनिक गुणधर्म। भौतिक गुणधर्म जैसे रंग, गंध, घनत्व, गलनांक, क्वथनांक आदि बिना पदार्थ के संघटन को बदले मापे जा सकते हैं। रासायनिक गुणधर्म जैसे दहनशीलता, अम्लता, क्षारता आदि मापने के लिए रासा

अभ्यास प्रश्नChapter 1

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.प्रश्न 3: यदि पानी का घनत्व 1000 g / m 3 है, तो पानी की मोलरता होगी-
A.विकल्प 1: 55.56मोल प्रति लिटर
B.विकल्प 2: 55मोल प्रति लिटर
C.विकल्प 3: 56मोल प्रति लिटर
D.विकल्प 4: 56.56मोल प्रति लिटर

उत्तर:

विकल्प 1: 55.56मोल प्रति लिटर

MediumNCERT
Q2.1.1 निम्नलिखित के लिए मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए- (i) H₂O (ii) CO₂ (iii) CH₄

उत्तर:

मोलर द्रव्यमान = तत्वों के परमाणु द्रव्यमान का योग (i) H₂O: H = 1 g/mol, O = 16 g/mol मोलर द्रव्यमान = 2×1 + 16 = 18 g/mol (ii) CO₂: C = 12 g/mol, O = 16 g/mol मोलर द्रव्यमान = 12 + 2×16 = 44 g/mol (iii) CH₄: C = 12 g/mol, H = 1 g/mol मोलर द्रव्यमान = 12 + 4×1 = 16 g/mol

व्याख्या:

प्रत्येक यौगिक के लिए उसके तत्वों के परमाणु द्रव्यमान को जोड़कर मोलर द्रव्यमान निकाला जाता है।

EasyNCERT
Q3.1.2 सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) में उपस्थित विभिन्न तत्वों के द्रव्यमान प्रतिशत का परिकलन कीजिए।

उत्तर:

Na = 23 g/mol, S = 32 g/mol, O = 16 g/mol मोलर द्रव्यमान Na₂SO₄ = 2×23 + 32 + 4×16 = 142 g/mol Na का प्रतिशत = (2×23 / 142) × 100 = 32.39% S का प्रतिशत = (32 / 142) × 100 = 22.54% O का प्रतिशत = (4×16 / 142) × 100 = 45.07%

व्याख्या:

प्रत्येक तत्व के कुल द्रव्यमान को यौगिक के कुल मोलर द्रव्यमान से भाग देकर प्रतिशत निकाला जाता है।

EasyNCERT
Q4.1.3 आयरन के उस ऑक्साइड का मूलानुपाती सूत्र ज्ञात कीजिए, जिसमें द्रव्यमान द्वारा 69.9% आयरन और 30.1% ऑक्सीजन है।

उत्तर:

आयरन (Fe) = 69.9 g, ऑक्सीजन (O) = 30.1 g मोल Fe = 69.9 / 55.85 = 1.252 मोल O = 30.1 / 16 = 1.881 मोल अनुपात Fe : O = 1.252 : 1.881 = 1 : 1.5 मूलानुपाती सूत्र Fe₂O₃ होगा क्योंकि 1 : 1.5 को 2 से गुणा करें।

व्याख्या:

दिए गए द्रव्यमान से मोल निकालकर सबसे छोटा अनुपात ज्ञात किया जाता है, जिससे मूलानुपाती सूत्र निर्धारित होता है।

MediumNCERT
Q5.1.4 प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का परिकलन कीजिए। जब (i) 1 मोल कार्बन को हवा में जलाया जाता है और (ii) 1 मोल कार्बन को 16 g ऑक्सीजन में जलाया जाता है।

उत्तर:

(i) प्रतिक्रिया: C + O₂ → CO₂ 1 मोल C से 1 मोल CO₂ बनेगा। अतः 1 मोल CO₂ प्राप्त होगा। (ii) 16 g O₂ = 16/32 = 0.5 मोल O₂ C + O₂ → CO₂ 1 मोल C के लिए 1 मोल O₂ चाहिए, पर O₂ कम है (0.5 मोल), अतः O₂ सीमांत अभिकर्मक है। 0.5 मोल O₂ से 0.5 मोल CO₂ बनेगा।

व्याख्या:

रासायनिक समीकरण के अनुसार मोल अनुपात से उत्पाद की मात्रा ज्ञात की जाती है।

MediumNCERT
Q6.1.5 सोडियम ऐसीटेट (CH₃COONa) का 500 mL, 0.375 मोलर जलीय विलयन बनाने के लिए उसके कितने द्रव्यमान की आवश्यकता होगी? सोडियम ऐसीटेट का मोलर द्रव्यमान 82.0245 g mol⁻¹ है।

उत्तर:

मोलरता (M) = मोल / लीटर विलयन मोल = M × लीटर = 0.375 × 0.5 = 0.1875 मोल द्रव्यमान = मोल × मोलर द्रव्यमान = 0.1875 × 82.0245 = 15.38 g

व्याख्या:

मोलरता से मोल ज्ञात कर द्रव्यमान निकाला जाता है।

EasyNCERT
Q7.1.6 सांद्र नाइट्रिक अम्ल के उस प्रतिदर्श का मोल प्रति लिटर में सांद्रता का परिकलन कीजिए, जिसमें उसका द्रव्यमान प्रतिशत 69% हो और जिसका घनत्व 1.41 g mL⁻¹ हो।

उत्तर:

घनत्व = 1.41 g/mL = 1410 g/L द्रव्यमान प्रतिशत = 69% अर्थात् 100 g विलयन में 69 g HNO₃ है। 1 L विलयन में HNO₃ का द्रव्यमान = 1410 × 0.69 = 972.9 g मोलर द्रव्यमान HNO₃ = 1 + 14 + 3×16 = 63 g/mol मोलरता = द्रव्यमान / मोलर द्रव्यमान = 972.9 / 63 = 15.44 M

व्याख्या:

द्रव्यमान प्रतिशत और घनत्व से द्रव्यमान ज्ञात कर मोलरता निकाली जाती है।

MediumNCERT
Q8.1.7 100 g कॉपर सल्फेट (CuSO₄) से कितना कॉपर प्राप्त किया जा सकता है?

उत्तर:

Cu = 63.5 g/mol, S = 32 g/mol, O = 16 g/mol मोलर द्रव्यमान CuSO₄ = 63.5 + 32 + 4×16 = 159.5 g/mol 100 g CuSO₄ में Cu का द्रव्यमान = (63.5 / 159.5) × 100 = 39.81 g

व्याख्या:

किसी यौगिक में तत्व का प्रतिशत ज्ञात कर कुल द्रव्यमान से गुणा किया जाता है।

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