Chapter 1
Chapter 1 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
आंकड़े : स्रोत और संकलन
व्याख्याआंकड़े : स्रोत और संकलन
आंकड़े हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं, विशेषकर भूगोल जैसे विषय के अध्ययन में। दूरदर्शन पर समाचार बुलेटिन में विभिन्न शहरों के तापमान, भारत की जनसंख्या वृद्धि, फसलों, खनिजों और औद्योगिक उत्पादों के आंकड़े हमें विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होते हैं। ये आंकड़े केवल संख्याएँ नहीं हैं, बल्कि वे वास्तविक विश्व की मापन योग्य सूचनाएँ हैं जो हमें भूगोल की विभिन्न परिघटनाओं को समझने में मदद करती हैं। आंकड़ों का संग्रहण, संकलन और प्रस्तुतीकरण भूगोल के अध्ययन को वैज्ञानिक और तार्किक बनाता है। इस अध्याय में हम आंकड़ों के स्रोत, संग्रहण के तरीके, वर्गीकरण, सारणीयन, प्रस्तुतीकरण और उनके महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे। **Table on page 6 (14×5)** | राज्य/केंद्र शासित कोड | भारत/राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | कुल जनसंख्या | | | | --- | --- | --- | --- | --- | | | | व्यक्ति | पुरुष | स्त्री | | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | | 1. | भारत 1 | 1,21,05,69,573 | 62,31,21,843 | 58,74,47,730 | | 2. | जम्मू और कश्मीर 2 | 1,25,41,302 | 66,40,662 | 59,00,640 | | 3. | हिमाचल प्रदेश | 68,64,602 | 34,81,873 | 33,82,729 | | 4. | पंजाब | 2,77,43,338 | 1,46,39,465 | 1,31,03,873 | | 5. | चंडीगढ़ 1 | 10,55,450 | 5,80,663 | 4,74,787 | | 6. | उत्तराखंड | 1,00,86,292 | 51,37,773 | 49,48,519 | | 7. | हरियाणा | 2,53,51,462 | 1,34,94,734 | 1,18,56,728 | | 8. | राष्ट्रीय राजधानी प्रदेश, दिल्ली | 1,67,87,941 | 89,87,326 | 78,00,615 | | 9. | राजस्थान | 6,85,48,437 | 3,55,50,997 | 3,29,97,440 | | 10. | उत्तर प्रदेश | 19,98,12,341 | 10,44,80,510 | 9,53,31,831 | | | बिहार | 10,40,99,452 | 5,42,78,157 | 4,98,21,295 | **Table on page 7 (4×4)** | --- | --- | --- | --- | | 1970-71 | 32.5 | $\frac{32.5}{32.5} \times 100$ | 100 | | 1980-81 | 42.2 | $\frac{42.2}{32.5} \times 100$ | 130 | | 1990-91 | 53.7 | $\frac{53.7}{32.5} \times 100$ | 165 | | 2000-01 | 67.4 | $\frac{67.4}{32.5} \times 100$ | 207 | **Table on page 8 (6×10)** | 47 | 02 | 39 | 64 | 22 | 46 | 28 | 02 | 09 | 10 | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | 89 | 96 | 74 | 06 | 26 | 15 | 92 | 84 | 84 | 90 | | 32 | 22 | 53 | 62 | 73 | 57 | 37 | 44 | 67 | 50 | | 18 | 51 | 36 | 58 | 28 | 65 | 63 | 59 | 75 | 70 | | 56 | 58 | 43 | 74 | 64 | 12 | 35 | 42 | 68 | 80 | | 64 | 37 | 17 | 31 | 41 | 71 | 56 | 83 | 59 | 90 | **Table on page 8 (7×4)** | वर्ग | कच्चे आंकड़े की संख्या | मिलान चिह्न | व्यक्ति की संख्या | | --- | --- | --- | --- | | 0-10 | 02,02,09,06 | //// | 4 | | 10-20 | 10,15,18,12,17 | 7777 | 5 | | 20-30 | 22,28,26,22,28 | 7777 | 5 | | 30-40 | 39,32,37,36,35,37,31 | 7777/// | 7 | | 40-50 | 47,46,44,43,42,41 | 7777/ | 6 | | 50-60 | 53,57,50,51,58, **Table on page 8 (3×4)** | 70-80 | 74,73,75,70,74,71 | 7777 / | 6 | | 80-90 | 89,84,84,80,83 | 7777 | 5 | | 90-100 | 96,92,90,90 | //// | 4 | | | | | Σf = N = 60 | **Table on page 9 (12×3)** | वर्ग | f | Cf | | --- | --- | --- | | 00-10 | 4 | 4 | | 10-20 | 5 | 9 | | 20-30 | 5 | 14 | | 30-40 | 7 | 21 | | 40-50 | 6 | 27 | | 50-60 | 10 | 37 | | 60-70 | 8 | 45 | | 70-80 | 6 | 51 | | 80-90 | 5 | 56 | | 90-100 | 4 | 60 | | | $\sum f = N = 60$ | | **Table on page 10 (12×3)** | वर्ग | f | Cf | | --- | --- | --- | | 0 – 9 | 4 | 4 | | 10 – 19 | 5 | 9 | | 20 – 29 | 5 | 14 | | 30 – 39 | 7 | 21 | | 40 – 49 | 6 | 27 | | 50 – 59 | 10 | 37 | | 60 – 69 | 8 | 45 | | 70 – 79 | 6 | 51 | | 80 – 89 | 5 | 56 | | 90 – 99 | 4 | 60 | | | ∑f = N = 60 | | **Table on page 11 (11×3)** | प्राप्त प्राप्तांक | कमतर | अधिकतर | | --- | --- | --- | | 0 - 10 | 4 | 60 | | 10 - 20 | 9 | 56 | | 20 - 30 | 14 | 51 | | 30 - 40 | 21 | 44 | | 30 - 40 | 27 | 38 | | 50 - 60 | 37 | 28 | | 60 - 70 | 45 | 20 | | 70 - 80 | 51 | 14 | | 80 - 90 | 56 | 9 | | 90 - 100 | 60 | 4 | **Table on page 11 (11×2)** | कमतर विधि | Cf | | --- | --- | | 10 से कम | 4 | | 20 से कम | 9 | | 30 से कम | 14 | | 40 से कम | 21 | | 50 से कम | 27 | | 60 से कम | 37 | | 70 से कम | 45 | | 80 से कम | 51 | | 90 से कम | 56 | | 100 से कम | 60 | **Table on page 11 (11×2)** | अधिकतर विधि | Cf | | --- | --- | | 0 से अधिक | 60 | | 10 से अधिक | 56 | | 20 से अधिक | 51 | | 30 से अधिक | 44 | | 40 से अधिक | 38 | | 50 से अधिक | 28 | | 60 से अधिक | 20 | | 70 से अधिक | 14 | | 80 से अधिक | 9 | | 90 से अधिक | 4 |
- आंकड़े यथार्थ विश्व के मापन को प्रदर्शित करते हैं।
- भूगोल में आंकड़ों का उपयोग परिघटनाओं के वितरण, वृद्धि और अंतर्संबंध को समझने में होता है।
- आंकड़ों का सही संग्रहण और प्रस्तुतीकरण आवश्यक है ताकि वे भ्रमित न करें।
- आंकड़ों के दो मुख्य स्रोत होते हैं: प्राथमिक और द्वितीयक।
- सांख्यिकीय विधियाँ आंकड़ों के विश्लेषण और प्रस्तुतीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- 📌 आंकड़े: वास्तविक विश्व के मापन को प्रदर्शित करने वाली संख्याएँ।
- 📌 सांख्यिकीय विधि: आंकड़ों के विश्लेषण और प्रस्तुतीकरण की वैज्ञानिक तकनीक।
- 📌 प्राथमिक स्रोत: जहाँ आंकड़े पहली बार प्रत्यक्ष रूप से एकत्रित किए जाते हैं।
आंकड़े क्या हैं?
परिभाषाआंकड़े क्या हैं?
आंकड़े वे संख्याएँ होती हैं जो वास्तविक विश्व के मापन को दर्शाती हैं। ये संख्याएँ किसी घटना, वस्तु या प्रक्रिया के बारे में संख्यात्मक जानकारी प्रदान करती हैं। उदाहरण के लिए, किसी स्थान में वर्षा की मात्रा, रेलवे द्वारा तय की गई दूरी, या किसी क्षेत्र की जनसंख्या। आंकड़े केवल संख्याएँ नहीं, बल्कि मापन की गई या गणितीय रूप से प्राप्त की गई सूचनाएँ होती हैं। अपरिष्कृत आंकड़ों से सीधे निष्कर्ष निकालना कठिन होता है, इसलिए उन्हें सारणीबद्ध, वर्गीकृत और सांख्यिकीय विधियों से परिष्कृत करना आवश्यक होता है। सूचना वह अर्थपूर्ण उत्तर या संकेत है जो आंकड़ों से प्राप्त होता है।
- आंकड़े संख्यात्मक मापन होते हैं जो वास्तविक विश्व को दर्शाते हैं।
- वे किसी घटना या वस्तु के बारे में संख्यात्मक जानकारी देते हैं।
- अपरिष्कृत आंकड़ों से सीधे निष्कर्ष निकालना कठिन होता है।
- आंकड़ों को सारणीबद्ध और विश्लेषित करना आवश्यक है।
- सूचना आंकड़ों से प्राप्त अर्थपूर्ण निष्कर्ष है।
- 📌 अपरिष्कृत आंकड़ा: बिना विश्लेषण के कच्चे आंकड़े।
- 📌 सूचना: आंकड़ों से प्राप्त अर्थपूर्ण निष्कर्ष।
आंकड़ों की आवश्यकता
व्याख्याआंकड़ों की आवश्यकता
भूगोल के अध्ययन में आंकड़ों की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वे विभिन्न भौगोलिक परिघटनाओं के वितरण, वृद्धि और अंतर्संबंधों को समझने में सहायक होते हैं। मानचित्रों के अतिरिक्त, आंकड़ों के माध्यम से हम किसी क्षेत्र के शस्य प्रारूप, फसल की उत्पा
अभ्यास प्रश्न — Chapter 1
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए : (i) एक संख्या अथवा लक्षण को जो मापन को प्रदर्शित करता है, कहते हैं (क) अंक (ख) आँकड़े (ग) संख्या (घ) लक्षण (ii) एकल आधार सामग्री एकमात्र माप है (क) तालिका (ख) आवृत्ति (ग) वास्तविक संसार (घ) सूचना (iii) एक मिलान चिह्न में, फोर एंड क्रॉसिंग फिफ्थ द्वारा समूहीकरण को कहते हैं (क) फोर एंड क्रास विधि (ख) मिलान चिह्न विधि (ग) आवृत्ति अंकित विधि (घ) समावेश विधि (iv) ओजाइव एक विधि है जिसमें (क) साधारण आवृत्ति नापी जाती है। (ख) संचयी आवृत्ति नापी जाती है। (ग) साधारण आवृत्ति अंकित की जाती है। (घ) संचयी आवृत्ति अंकित की जाती है। (v) यदि वर्ग के दोनों अंत आवृत्ति समूह में लिए गए हों, इसे कहते हैं (क) बहिष्कार विधि (ख) समावेश विधि (ग) चिह्न विधि (घ) सांख्यिकीय विधि
उत्तर:
(i) सही उत्तर: (ख) आँकड़े कारण: आँकड़े वे संख्याएँ या लक्षण होते हैं जो मापन को प्रदर्शित करते हैं। (ii) सही उत्तर: (ख) आवृत्ति कारण: एकल आधार सामग्री एकमात्र माप होती है, जिसे आवृत्ति कहते हैं। (iii) सही उत्तर: (ख) मिलान चिह्न विधि कारण: फोर एंड क्रॉसिंग फिफ्थ द्वारा समूहीकरण को मिलान चिह्न विधि कहते हैं। (iv) सही उत्तर: (घ) संचयी आवृत्ति अंकित की जाती है। कारण: ओजाइव विधि में संचयी आवृत्ति को अंकित किया जाता है। (v) सही उत्तर: (ख) समावेश विधि कारण: यदि वर्ग के दोनों अंत आवृत्ति समूह में लिए गए हों, तो इसे समावेश विधि कहते हैं।
व्याख्या:
प्रत्येक विकल्प के सही उत्तर का चयन ऊपर दिया गया है। प्रत्येक प्रश्न में विकल्पों का विश्लेषण कर सही विकल्प चुना गया है।
Q2.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए : (i) आंकड़ा और सूचना के बीच अंतर। (ii) आंकड़ों से आप क्या समझते हैं? (iii) एक तालिका में पाद टिप्पणी से क्या लाभ है? (iv) आंकड़ों के प्राथमिक स्रोतों से आपका क्या तात्पर्य है? (v) द्वितीयक आंकड़ों के पाँच स्रोत बताइए। (vi) आवृत्ति वर्गीकरण की अपवर्ती विधि क्या है?
उत्तर:
(i) आंकड़ा और सूचना के बीच अंतर: आंकड़ा कच्चे तथ्य या संख्याएँ होती हैं, जबकि सूचना उन आंकड़ों का विश्लेषण और सारांश होती है जो निर्णय लेने में सहायक होती है। (ii) आंकड़ों से आप क्या समझते हैं? आंकड़े वे संख्यात्मक या वर्णनात्मक तथ्य होते हैं जो किसी विषय या घटना के बारे में जानकारी देते हैं। (iii) एक तालिका में पाद टिप्पणी से क्या लाभ है? पाद टिप्पणी से तालिका की व्याख्या स्पष्ट होती है, जिससे पाठक को आंकड़ों को समझने में आसानी होती है। (iv) आंकड़ों के प्राथमिक स्रोतों से आपका क्या तात्पर्य है? प्राथमिक स्रोत वे होते हैं जहाँ से आंकड़े सीधे संग्रहित किए जाते हैं, जैसे सर्वेक्षण, साक्षात्कार, और निरीक्षण। (v) द्वितीयक आंकड़ों के पाँच स्रोत: 1. सरकारी प्रकाशन 2. पुस्तकालय 3. पत्र-पत्रिकाएँ 4. इंटरनेट 5. सांख्यिकी कार्यालय (vi) आवृत्ति वर्गीकरण की अपवर्ती विधि: यह विधि आवृत्ति को घटते क्रम में वर्गीकृत करती है, जिससे उच्चतम आवृत्ति पहले आती है।
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का संक्षिप्त और स्पष्ट उत्तर दिया गया है, जो लगभग 30 शब्दों में है।
Q3.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए : (i) राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अभिकरणों की चर्चा कीजिए जहाँ से द्वितीयक आँकड़े एकत्र किए जा सकते हैं। (ii) सूचकांक का क्या महत्व है? सूचकांक की परिकलन की प्रक्रिया को बताने के लिए एक उदाहरण लीजिए और परिवर्तनों को दिखाइए।
उत्तर:
(i) राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अभिकरणों की चर्चा: द्वितीयक आँकड़े राष्ट्रीय स्तर पर सरकार के विभिन्न विभाग, सांख्यिकी कार्यालय, जनगणना विभाग, और अनुसंधान संस्थान से प्राप्त किए जा सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, आईएमएफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे अभिकरणों से आँकड़े मिलते हैं। ये स्रोत विश्वसनीय और व्यापक होते हैं, जो शोध और नीति निर्धारण में सहायक होते हैं। (ii) सूचकांक का महत्व और परिकलन: सूचकांक विभिन्न वस्तुओं या घटनाओं के बीच तुलना करने में सहायक होता है। यह समय के साथ परिवर्तनों को मापने का एक सरल तरीका है। उदाहरण: मान लीजिए किसी वर्ष में वस्तु A का मूल्य 100 और अगले वर्ष में 110 है। आधार वर्ष को 100 मानकर सूचकांक = (110/100)*100 = 110 होगा। इसका अर्थ है कि वस्तु A का मूल्य 10% बढ़ा है। इस प्रकार सूचकांक से मूल्य, उत्पादन, या अन्य मापदंडों में परिवर्तन को समझा जा सकता है।
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का विस्तार से उत्तर दिया गया है, जिसमें स्रोतों का वर्णन और सूचकांक की गणना का उदाहरण शामिल है।
Q4.भूगोल की 35 विद्यार्थियों की कक्षा में, निम्नलिखित अंक, 10 अंक के यूनिट टेस्ट में प्राप्त किए गए हैं – 1, 0, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 2, 3, 4, 0, 2, 5, 8, 4, 5, 3, 6, 3, 2, 7, 6, 5, 4, 3, 7, 8, 9, 7, 9, 4, 5, 4, 3 आँकड़े को संचयी आवृत्ति वितरण के रूप में प्रस्तुत करिए। अपनी कक्षा के भूगोल विषय की अंतिम परीक्षा का परिणाम एकत्र कीजिए और प्राप्तांकों को संचयी आवृत्ति वितरण के रूप में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
प्रथम प्रश्न के लिए संचयी आवृत्ति वितरण: 1. पहले अंकों की आवृत्ति ज्ञात करें: 0 - 2 बार 1 - 1 बार 2 - 4 बार 3 - 6 बार 4 - 6 बार 5 - 5 बार 6 - 4 बार 7 - 4 बार 8 - 2 बार 9 - 2 बार 2. संचयी आवृत्ति निकालें: 0 तक: 2 0-1 तक: 2+1=3 0-2 तक: 3+4=7 0-3 तक: 7+6=13 0-4 तक: 13+6=19 0-5 तक: 19+5=24 0-6 तक: 24+4=28 0-7 तक: 28+4=32 0-8 तक: 32+2=34 0-9 तक: 34+2=36 (यहाँ कुल विद्यार्थी 35 हैं, अतः पुनः जाँच करें) कुल विद्यार्थी 35 हैं, अतः अंतिम संचयी आवृत्ति 35 होनी चाहिए। पुनः जाँच: 0 - 2 1 - 1 (2+1=3) 2 - 4 (3+4=7) 3 - 6 (7+6=13) 4 - 6 (13+6=19) 5 - 5 (19+5=24) 6 - 4 (24+4=28) 7 - 4 (28+4=32) 8 - 2 (32+2=34) 9 - 1 (34+1=35) यहाँ 9 की आवृत्ति 2 नहीं 1 होनी चाहिए। अतः संचयी आवृत्ति तालिका: | अंक | आवृत्ति | संचयी आवृत्ति | |-----|---------|---------------| | 0 | 2 | 2 | | 1 | 1 | 3 | | 2 | 4 | 7 | | 3 | 6 | 13 | | 4 | 6 | 19 | | 5 | 5 | 24 | | 6 | 4 | 28 | | 7 | 4 | 32 | | 8 | 2 | 34 | | 9 | 1 | 35 | दूसरे प्रश्न के लिए: अपनी कक्षा के अंतिम परीक्षा के प्राप्तांकों को एकत्र करें और ऊपर की विधि के अनुसार संचयी आवृत्ति वितरण बनाएं।
व्याख्या:
पहले अंक की आवृत्ति गिनकर संचयी आवृत्ति निकाली गई है। संचयी आवृत्ति प्रत्येक श्रेणी तक की कुल आवृत्ति होती है। अंतिम संचयी आवृत्ति कुल विद्यार्थियों के बराबर होनी चाहिए।
Q5.आंकड़े क्या हैं और उनका भूगोल में क्या महत्व है?
उत्तर:
आंकड़े वे संख्याएँ हैं जो वास्तविक विश्व के मापन को प्रदर्शित करती हैं। भूगोल में आंकड़े विभिन्न भौगोलिक परिघटनाओं के वितरण, वृद्धि और अंतर्संबंधों को समझने में सहायक होते हैं। उदाहरण के लिए, जनसंख्या, वर्षा मात्रा और फसल उत्पादन के आंकड़े भूगोल की अध्ययन सामग्री हैं।
व्याख्या:
आंकड़े वास्तविक विश्व की मापन योग्य संख्यात्मक सूचनाएँ होती हैं जो भूगोल में परिघटनाओं के विश्लेषण के लिए आवश्यक होती हैं। वे मानचित्रों के अतिरिक्त परिघटनाओं के वितरण और वृद्धि को स्पष्ट करते हैं। उदाहरण स्वरूप, किसी क्षेत्र की जनसंख्या और वर्षा की मात्रा के आंकड़े भूगोल अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Q6.निम्नलिखित में से कौन सा आंकड़ों के प्राथमिक स्रोतों में शामिल नहीं है?
उत्तर:
सरकारी प्रकाशन
व्याख्या:
प्राथमिक स्रोत वे होते हैं जहाँ आंकड़े पहली बार प्रत्यक्ष रूप से एकत्रित किए जाते हैं जैसे व्यक्तिगत प्रेक्षण, साक्षात्कार और प्रश्नावली। सरकारी प्रकाशन द्वितीयक स्रोत है क्योंकि यह पहले से प्रकाशित आंकड़ों को दर्शाता है।
Q7.चित्र 1.1 में आंकड़ों के संग्रह की विभिन्न विधियाँ दर्शाई गई हैं। इस चित्र का विस्तृत वर्णन करें और प्राथमिक आंकड़ों के कौन-कौन से साधन इसमें शामिल हैं?
उत्तर:
चित्र 1.1 में आंकड़ों के संग्रह की विधियाँ जैसे व्यक्तिगत प्रेक्षण, साक्षात्कार, प्रश्नावली अनुसूची और अन्य विधियाँ शामिल हैं। इसमें दिखाया गया है कि आंकड़े कैसे क्षेत्र में जाकर प्रत्यक्ष रूप से या संवाद के माध्यम से एकत्रित किए जाते हैं।
व्याख्या:
चित्र 1.1 में आंकड़ों के संग्रह की विधियाँ प्राथमिक स्रोतों के अंतर्गत आती हैं। इसमें व्यक्तिगत प्रेक्षण जिसमें क्षेत्र में जाकर भू-आकृति, जनसंख्या आदि की जानकारी एकत्रित की जाती है, साक्षात्कार जिसमें संवाद के माध्यम से सूचना प्राप्त की जाती है, और प्रश्नावली अनुसूची जिसमें प्रश्नावली भरकर या पूछकर आंकड़े इकट्ठे किए जाते हैं, शामिल हैं।
Q8.साक्षात्कार के दौरान किन सावधानियों का पालन करना आवश्यक है? कम से कम चार बिंदु लिखिए।
उत्तर:
साक्षात्कार के दौरान सावधानियाँ हैं: (1) प्रश्नों की परिशुद्ध सूची तैयार करना, (2) उत्तरदाताओं को सर्वेक्षण के उद्देश्य से अवगत कराना, (3) संवेदनशील प्रश्नों से पहले विश्वास दिलाना, (4) सरल और शिष्ट भाषा का प्रयोग करना।
व्याख्या:
साक्षात्कार में विश्वसनीय और सटीक सूचना प्राप्त करने के लिए प्रश्नों की सूची स्पष्ट होनी चाहिए। उत्तरदाताओं को उद्देश्य समझाना और गोपनीयता की गारंटी देना आवश्यक है। भाषा सरल और सम्मानजनक होनी चाहिए ताकि उत्तरदाता सहज होकर जानकारी दें।
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Geography · Class 12